उत्तर प्रदेश में कीटनाशकों पर प्रतिबंध
बासमती चावल के निर्यात को सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम
उत्तर प्रदेश सरकार ने 90 दिनों के लिए 11 कीटनाशकों के उपयोग, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगाया है। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि ये कीटनाशक भारत के बासमती चावल की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे थे, जिससे निर्यात में बाधा उत्पन्न हो रही थी। इस कदम का उद्देश्य बासमती चावल की अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गुणवत्ता बनाए रखना और निर्यात सुनिश्चित करना है।
अतिरिक्त जानकारी
प्रतिबंधित कीटनाशकों की सूची:
- Acephate
- Buprofezin
- Chlorpyrifos
- Propiconazole
- Thiamethoxam
- Profenofos
- Carbendazim
- Tricyclazole
- Tebuconazole
- Carbofuran
- Imidacloprid
प्रतिबंध का अवधि और विस्तार
यह प्रतिबंध तीन महीने (लगभग 90 दिन) के लिए लागू होगा, जिससे प्रभावित किसानों और विक्रेताओं को अनुकूलन का समय मिल सके।
उद्देश्य और लाभ
रिसर्च और निर्यात से जुड़े संगठनों ने बताया कि कई बासमती नमूनों में कीटनाशकों की अवशिष्ट मात्रा MRL से अधिक पायी गई। इससे निर्यात में नुकसान और गुणवत्ता की छवि धूमिल हो रही थी। प्रतिबंध का मुख्य उद्देश्य बासमती की गुणवत्ता बनाए रखना और वैश्विक बाजार में भारत की विश्वसनीयता और निर्यात सुनिश्चित करना है।
राष्ट्रीय संदर्भ
पंजाब सरकार ने 1 अगस्त 2025 से 30 सितंबर 2025 तक इसी 11 कीटनाशकों पर रोक लगाई है। हरियाणा सरकार भी इसी दिशा में कदम उठा रही है—वह भी 60–90 दिनों तक समान प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है।
विस्तृत नोट्स
| विषय | विवरण |
|---|---|
| लक्ष्य | बासमती चावल की गुणवत्ता बनाए रखना, MRL उल्लंघनों को रोकना, और निर्यात सुनिश्चित करना। |
| प्रतिबंध अवधि | लगभग 3 महीने (90 दिन)। |
| प्रतिबंधित कीटनाशक | Acephate, Buprofezin, Chlorpyrifos, Propiconazole, Thiamethoxam, Profenofos, Carbendazim, Tricyclazole, Tebuconazole, Carbofuran, Imidacloprid। |
| कारण | निर्यात में कीटनाशक अवशेषों के कारण गुणवत्ता और साख पर संकट। |
| राष्ट्रीय पैटर्न | पंजाब (1 अगस्त–30 सितंबर 2025), हरियाणा भी प्रतिबंध की तैयारी में है। |
| सरकारी पहल | किसानों में रसायनों से मुक्त खेती की जानकारी बढ़ाना; वैकल्पिक सुरक्षित उपाय सुझाना। |